Friday, 10 February 2012

निवेदन


              

मैं मूढ़मति, लोभी, कामी, अज्ञानी हूँ,ऐ मॉ ।
पर जैसा भी हूँहूँ तो मैं तेरी ही संतति, मॉ ।।

छल कपट प्रपंच से आच्छादित मेरा जीवन है, मॉ ।
इस सुकृत-शून्य जीवन पथ पर सर्वत्र तिमिर है, मॉ ।।
शतकोटि सूर्य की दिव्य प्रभा से दीप्यमान तू, मॉ ।
आलोकित कर दो मेरे जीवन पथ को तू, ऐ मॉ ।।

मैं मूढ़मति, लोभी, कामी, अज्ञानी हूँऐ मॉ ।
पर जैसा भी हूँहूँ तो मैं तेरी ही संतति, मॉ ।।

इस काम क्रोध मद मोह लोभ ने बहुत सताया, मॉ ।
इस सब ने मिल मेरी मति को दिग्भ्रमित किया, ऐ मॉ ।।
तू इनको अपनी रूद्र दृष्टि से भष्मिभूत कर दो, ऐ मॉ ।
और अपनी कृपा दृष्टि से मुझको धन्य-धन्य कर दो, ऐ मॉ ।।

मैं मूढ़मति, लोभी, कामी, अज्ञानी हूँऐ मॉ ।
पर जैसा भी हूँहूँ तो मैं तेरी ही संतति, मॉ ।।

मेरे अन्तर में ज्ञान ज्योति प्रज्ज्वलित करो ऐ,  मॉ ।
मेरे अन्तर में भक्ति धार संचारित कर दो, मॉ ।।
अपनी विभूतियो का मुझपर संवर्षन कर दो, मॉ ।
और मुझको अपने श्री चरणो का दास बनाओ, मॉ ।।

मैं मूढ़मति, लोभी, कामी, अज्ञानी हूँऐ मॉ ।
पर जैसा भी हूँहूँ तो मैं तेरी ही संतति, मॉ ।।
                                              --- रमेश
       

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