मैं
एक दलित हूँ ।
सरकार
का कर्तव्य है कि वो मुझे जिलाए, खिलाये और आरक्षण दे कर समाज की मुख्य धारा तक लाये ।
परन्तु
कुछ सिरफिरे
हाय तौबा मचा रहे है कि आखिर कब तक मैं इस सरकारी मलाई को खाता रहूगाँ ।
अरे
मूर्खो ! सीधी सी बात है- जब तक मै भी तरक्की
करके समाज की मुख्य धारा में सम्मिलित नहीं हो जाता हूँ, तबतक ।
परन्तु
मैं ऐसा करूगाँ नहीं । क्योंकि ऐसा करने से तो सरकारी मलाई मिलनी बंद हो जाएगी न ।
चाहे
सरकार कितना भी जोर क्यों न लगाये, मैं जहॉ हूँ, वहीं रहूगाँ।
अरे
मूर्खो ! मैं तुम्हें इतना मूर्ख नजर आता हूँ क्या, जो मुफ्त की मलाई को छोड़ने के लिये मेहनत करूँ ।
