Friday, 24 February 2012

एकदन्त


हे गणपति, हे गजबदन, गजानन विध्नेश्वर है नाम तेरा ।
हे मूषकवाहन विध्न रहित कर दो सारा जीवन मेरा ।।
मेरे जीवन में ज्ञान ज्योति प्रज्ज्वलित करो तुम हे देवा ।
मेरे जीवन में भकितधार संचारित कर दो हे देवा ।।

वह कौन देव है सर्वश्रेष्ठ जिसको पहले पूजा जाये ।
इस कठिन प्रश्न का कोर्इ हल जब शिवजी नहीं ढ़ूढ पाये ।।
तब कहा उन्होंने इस ब्रम्हान्ड की करे परिक्रमा जो पहले ।
पूजा जाएगा इस दुनिया में वही देव सबसे पहले ।।

मूषक पर हो कर के सवार यह कार्य नहीं हो सकता था ।
इस मसले का हल तो केवल बुद्धि विवके से करना था ।।
तब मा पार्वती को ला करके शिव जी के बगल में बैठाया ।
फिर अपने मूषक पर सवार हो उनकी परिक्रमा ही कर डाला ।।

कुछ सुमधुर और सुखद आश्चर्य से भर कर शिव जी ये बोले -
हे पुत्र, हुए तुम ही विजयी इसमे न कहीं कोर्इ संशय है ।
तुमने इस कृत्य से लाल मेरे, पितु मात का मान बढ़ाया है ।
तू धप्न्य धन्य है एकदन्त तू ही मेरा गणपति भी है ।।

अब इस सौभाग्य को पा न सकेगा कभी कोर्इ भी देव दूजा ।
हर मंलग कार्य में सदा वत्स होगी पहले तेरी पूजा ।।
तू वक्रतुण्ड, तू विध्नेश्वर, तू लंबोदर गणनायक है ।
तू एकदन्त, तू गणपति है, तू ही गजबदन, गजानन है ।।


हे गणपति, हे गजबदन, गजानन विध्नेश्वर है नाम तेरा ।
हे मूषकवाहन विध्न रहित कर दो सारा जीवन मेरा ।।
मेरे जीवन में ज्ञान ज्योति प्रज्ज्वलित करो तुम हे देवा ।
मेरे जीवन में भकितधार संचारित कर दो हे देवा ।।

1 comment:

  1. Very nice and beautifully written....really soul touching. Shows the true picture of the Lord Ganesha.

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