Sunday, 16 September 2012


मैं एक दलित हूँ
सरकार का कर्तव्य है कि वो मुझे जिलाए, खिलाये और आरक्षण दे कर समाज की मुख्य धारा तक लाये
परन्तु कुछ सिरफिरे हाय तौबा मचा रहे है कि आखिर कब तक मैं इस सरकारी मलाई को खाता रहूगाँ
अरे मूर्खो ! सीधी सी बात है- जब तक मै भी तरक्की करके समाज की मुख्य धारा में सम्मिलित नहीं हो जाता हूँ, तबतक
परन्तु मैं ऐसा करूगाँ नहीं क्योंकि ऐसा करने से तो सरकारी मलाई मिलनी बंद हो जाएगी
चाहे सरकार कितना भी जोर क्यों लगाये, मैं जहॉ हूँ, वहीं रहूगाँ
अरे मूर्खो ! मैं तुम्हें इतना मूर्ख नजर आता हूँ क्या, जो मुफ्त की मलाई को छोड़ने के लिये मेहनत करूँ

1 comment:

  1. एक भिखमंगे तो अम्बेडकर लाटरी लग गयी , उसने एक मंहगी कार खरीदी , अब उसने कार में बैठकर भीख मांगनी शुरू कर दी . भिखारी आखिर भिखारी ही रहेगा न ? आदत से लाचार ! पढ़े ब्लॉग "मेरे विचार" : renikbafna.blogspot.com

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