Saturday, 13 April 2013

आखिर कबतक


आज कल शहर में क्राईम कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है रोज चोरी] डकैती] छिनतई की घटनाए सुनने में रही हैं शुक्र है कि इनके साथ ही हमारी लोकल पुलिस भी काफी सक्रिय हो गई है अपराधियों] वांछितों और हिस्ट्रीसीटर्स की तलाश तेज कर दी गई है जगह जगह छापेमारी हो रही है इसी क्रम में पुलिस कप्तान का एक नया फरमान सभी थानाध्यक्षों को मिला है सभी थानाध्यक्ष अपने अपने क्षे़त्र में सघन वाहन चेकिंग करें और संदिग्ध प्रतीत होने वाले व्यक्तियों से पुछताछ  करें  
कप्तान साहब के आदेश के अनुपालन में हमारे थानाध्यक्ष महोदय भी अपने पूरे दलबल के साथ जजकोठी मोड पर सुबह से ही जमे हैं उन्होंने अपने सिपाहियों को आदेश दे रखा है कि सड़क पर गुजरने वाले सभी मोटरसाईकिल सवारों को रोका जाय आगे यह भी आदेश है कि वे हर एक मोटर साइकिल की डिकी खुलवा कर चेक किया  जाय कागज पत्तर भी चेक किया जाय सब कुछ ठीक ठाक रहे तो जाने दिया जाय अन्यथा गाड़ी साइड में लगावा के गाड़ी मालिक को दारोगा जी के हुजूर में हाजिर किया जाय
दोपहर होते होते मोड पर मोटरसाइकिलों की कतार लग गई कोई बिना हेलमेट के गाड़ी चाल रहा था तो कोई ट्रीपल सवारी बैठाये हुए था किसी के पास ओनर बुक नहीं है तो किसी का ड्राइविंग लाइसेन्स नहीं है किसी किसी के पास इनश्यूरेन्स का कागज नहीं है सभी गाड़ियॉ कतार में लगा दी गई हैं और सभी वाहन मालिक अपने मोबाइल पर अपने अपने  कान्टैक्ट्स को तलाश रहें हैं कोई अपने डी0एस0पी0 जीजा को फोन लगा रहा है जो सासाराम में पोस्टेड हैं तो कोई अपने बी0डी00 भाई को फोन लगा रहा है जो जामतारा में पोस्टेड हैं जिस बेचारों के जीजा डी0एस0पी0 या भाई बी0डी00 नहीं है वो हवलदार साहब से आरजू मिन्नत कर रहा है कि कुछ ले दे के मामले को रफा दफा करें जिसके कौन्टैक्ट का टॉका भिड़ जा रहा है] उसके बारे में दारोगा जी हवलदार साहब से कहते हैं कि इन्हें जाने दो । उपर से आर्डर आया है और वो अपनी गाड़ी ले खुशी खुशी चलता हो जा रहा है अन्य पकड़ गये लोग उसे हसरत भरी नजरों से देखते रह जा रहे हैं
देखिये ! एक बीस पच्चीस का लड़का अपने पल्सर को उड़ाये लिये रहा है सिपाही जी अपना डंडा लिये लपकते हैं -
! रूक रूक रूक
लड़का सिपाही जी के समीप के ब्रेक लगाता है गाड़ी को खड़ी करके अपना हेलमेट उतारता है सिपाही जी छूटते ही बोलते है -
चल ! डिकी खोल चेक करूगॉ कोई हथियार वथियार या बम वम तो नहीं रखा है
लड़का भौंचका गया उसकी गाड़ी में तो डिकी था ही नहीं फिर सिपाही जी क्या खोलने के लिये कह रहे हैं लड़का समझाने वाली मुद्रा में बोला -
सर ! मेरी गाड़ी में तो डिकी है ही नहीं
अच्छा तो डिकी नहीं है ! चल ! साहब के पास चल
सिपाही जी उस लड़के को दारोगा जी के पास लाये और बोले-
सर ! देखिये यह कितना शातीर है चेकिंग के डर से डिकी घर पर ही छोड़ के आया है
दारोगा जी ने सिपाही की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया  और लड़के से  बाले -
चलो गाड़ी के कागज लाओ
लड़का गाड़ी के सीट कौभर के नीचे से एक प्लास्टिक का लिफाफा निकाल लाया दारोगा जी ने कागज देखे सभी कागज दुरूस्त थें लड़के के पास ड्राइविंग लाइसेन्स भी था इन्शूरेन्स भी था ओनर बुक भी ठीक वन टाईस टैक्स पेड दारोगा जी संतुष्ट नहीं हो पा रहे थे ऐसा कैसे संभव है सारा कुछ ठीक ठाक तो हो ही नहीं सकता है जरूर दाल में कुछ काला है लेकिन क्या काला है ?  कहॉ काला है ? ये समझ में नहीं रहा था एकाएक दारोगा जी के दिमाग की बत्ती जल उठी वे तपाक से बोले-
ठीक है ! चल अपना आई0डी0 तो दिखा देखू तू भी कितना शातीर है
लड़के ने अपने पाकेट से अपना भोटर आई0डी0 आधार कार्ड और कालेज का आई0डी0 तीनों निकाल कर दारोगा जी के सामने रख दिया दारोगा जी इन सारे आई0डी0 को उलट पुलट कर देखते रहे । सब कुछ ठीक ठाक । आखिर कहें तो क्या कहें । फिर सारे आई0डी0 लौटाते हुए खीझ कर बोले-
खड़े खड़े मेरा मुख क्या देख रहा है चल फूट यहॉ से
लड़का अपने बाईक पर बैठा और फुर्र से उड़ गया
उधर सिपाही जी बेचारे अपना माथा खुजाते हुए सोच रहे थे कि इतने बड़े बदमाश को पकड़ के लाया और शाबाशी देना तो दूर की बात है] उल्टे दारोगा जी ने उसे यू ही जाने क्यों दिया ?

इधर मैं अपना सर खुजाते हुए यह सोच रहा था कि जिनके कान्टैक्ट का टॉका भिड़ जा रहा था] उनके बारे में दारोगा जी इतनी छानबीन क्यों नहीं कर रहे थे ?  
आखिर कबतक ऐसे चलेगा ?

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