आज कल शहर में क्राईम कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है । रोज चोरी] डकैती] छिनतई की घटनाए सुनने में आ रही हैं । शुक्र है कि इनके साथ ही हमारी लोकल पुलिस भी काफी सक्रिय हो गई है । अपराधियों] वांछितों और हिस्ट्रीसीटर्स की तलाश तेज कर दी गई है । जगह जगह छापेमारी हो रही है । इसी क्रम में पुलिस कप्तान का एक नया फरमान सभी थानाध्यक्षों को मिला है । सभी थानाध्यक्ष अपने अपने क्षे़त्र में सघन वाहन चेकिंग करें और संदिग्ध प्रतीत होने वाले व्यक्तियों से पुछताछ करें ।
कप्तान साहब के आदेश के अनुपालन में हमारे थानाध्यक्ष महोदय भी अपने पूरे दलबल के साथ जजकोठी मोड पर सुबह से ही आ जमे हैं । उन्होंने अपने सिपाहियों को आदेश दे रखा है कि सड़क पर गुजरने वाले सभी मोटरसाईकिल सवारों को रोका जाय । आगे यह भी आदेश है कि वे हर एक मोटर साइकिल की डिकी खुलवा कर चेक किया जाय । कागज पत्तर भी चेक किया जाय । सब कुछ ठीक ठाक रहे तो जाने दिया जाय अन्यथा गाड़ी साइड में लगावा के गाड़ी मालिक को दारोगा जी के हुजूर में हाजिर किया जाय ।
दोपहर होते होते मोड पर मोटरसाइकिलों की कतार लग गई । कोई बिना हेलमेट के गाड़ी चाल रहा था तो कोई ट्रीपल सवारी बैठाये हुए था । किसी के पास ओनर बुक नहीं है तो किसी का ड्राइविंग लाइसेन्स नहीं है । किसी किसी के पास इनश्यूरेन्स का कागज नहीं है । सभी गाड़ियॉ कतार में लगा दी गई हैं और सभी वाहन मालिक अपने मोबाइल पर अपने अपने कान्टैक्ट्स को तलाश रहें हैं । कोई अपने डी0एस0पी0 जीजा को फोन लगा रहा है जो सासाराम में पोस्टेड हैं तो कोई अपने बी0डी0ओ0 भाई को फोन लगा रहा है जो जामतारा में पोस्टेड हैं । जिस बेचारों के जीजा डी0एस0पी0 या भाई बी0डी0ओ0 नहीं है वो हवलदार साहब से आरजू मिन्नत कर रहा है कि कुछ ले दे के मामले को रफा दफा करें । जिसके कौन्टैक्ट का टॉका भिड़ जा रहा है] उसके बारे में दारोगा जी हवलदार साहब से कहते हैं कि इन्हें जाने दो । उपर से आर्डर आया है । और वो अपनी गाड़ी ले खुशी खुशी चलता हो जा रहा है । अन्य पकड़ गये लोग उसे हसरत भरी नजरों से देखते रह जा रहे हैं ।
ओ देखिये ! एक बीस पच्चीस का लड़का अपने पल्सर को उड़ाये लिये आ रहा है । सिपाही जी अपना डंडा लिये लपकते हैं -
ऐ ! रूक रूक रूक
लड़का सिपाही जी के समीप आ के ब्रेक लगाता है । गाड़ी को खड़ी करके अपना हेलमेट उतारता है । सिपाही जी छूटते ही बोलते है -
चल ! डिकी खोल । चेक करूगॉ । कोई हथियार वथियार या बम वम तो नहीं रखा है न ।
लड़का भौंचका गया । उसकी गाड़ी में तो डिकी था ही नहीं फिर सिपाही जी क्या खोलने के लिये कह रहे हैं । लड़का समझाने वाली मुद्रा में बोला -
सर ! मेरी गाड़ी में तो डिकी है ही नहीं
अच्छा तो डिकी नहीं है ! चल ! साहब के पास चल ।
सिपाही जी उस लड़के को दारोगा जी के पास लाये और बोले-
सर ! देखिये यह कितना शातीर है । चेकिंग के डर से डिकी घर पर ही छोड़ के आया है ।
दारोगा जी ने सिपाही की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और लड़के से बाले -
चलो गाड़ी के कागज लाओ ।
लड़का गाड़ी के सीट कौभर के नीचे से एक प्लास्टिक का लिफाफा निकाल लाया । दारोगा जी ने कागज देखे । सभी कागज दुरूस्त थें । लड़के के पास ड्राइविंग लाइसेन्स भी था । इन्शूरेन्स भी था । ओनर बुक भी ठीक । वन टाईस टैक्स पेड । दारोगा जी संतुष्ट नहीं हो पा रहे थे । ऐसा कैसे संभव है । सारा कुछ ठीक ठाक तो हो ही नहीं सकता है । जरूर दाल में कुछ काला है । लेकिन क्या काला है ? कहॉ काला है ? ये समझ में नहीं आ रहा था । एकाएक दारोगा जी के दिमाग की बत्ती जल उठी । वे तपाक से बोले-
ठीक है ! चल अपना आई0डी0 तो दिखा । देखू तू भी कितना शातीर है ।
लड़के ने अपने पाकेट से अपना भोटर आई0डी0 आधार कार्ड और कालेज का आई0डी0 तीनों निकाल कर दारोगा जी के सामने रख दिया । दारोगा जी इन सारे आई0डी0 को उलट पुलट कर देखते रहे । सब कुछ
ठीक ठाक । आखिर कहें तो क्या कहें । फिर सारे आई0डी0 लौटाते हुए खीझ कर बोले-
खड़े खड़े मेरा मुख क्या देख रहा है । चल फूट यहॉ से ।
लड़का अपने बाईक पर बैठा और फुर्र से उड़ गया ।
उधर सिपाही जी बेचारे अपना माथा खुजाते हुए सोच रहे थे कि इतने बड़े बदमाश को पकड़ के लाया और शाबाशी देना तो दूर की बात है] उल्टे दारोगा जी ने उसे यू ही जाने क्यों दिया ?
इधर मैं अपना सर खुजाते हुए यह सोच रहा था कि जिनके कान्टैक्ट का टॉका भिड़ जा रहा था] उनके बारे में दारोगा जी इतनी छानबीन क्यों नहीं कर रहे थे ?
आखिर कबतक ऐसे चलेगा ?
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